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Category Archives: पशुपालन

गोबर से बने उपलों का उपयोग विभिन्न मांगलिक कार्यों में किया ही जाता है| यही वजह है कि ऑनलाइन बाजार में इसकी काफी मांग बढ़ी है| गाय के गोबर से लेकर उससे बना उपला जिसे गोइठा और कंडा भी कहते हैं| ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर अपनी जगह बना चुका है| ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स इन कंडों को भी शानदार पैकिंग मे करके होम डिलीवरी करा रही है| www.ebay.com , www.shopclues.com , www.gaukranti.org , Amazon.com  आदि कई साइट्स पर कंडे बिक रहे हैं| जहां आर्डर करने पर कुछ ही दिनों में उसकी डिलीवरी हो जाएगी|  यही नहीं ग्राहकों की सहूलियत के लिए कई साइट्स पर इन उपलों के आकार और वजन का भी ब्यौरा मौजूद है| इन साइट्स पर एक दर्जन उपलों का मूल्य 100 से लेकर 300 रुपये तक है| दो दर्जन मंगवाने पर डिस्काउंट दिया जा रहा है| त्यौहारी मौसम में इन उपलों पर कई डिस्काउंट ऑफर भी दिए जाते हैं| यहां आपको उपलों की कीमत भले ही थोड़ी ज्यादा लगे| लेकिन इसके आध्यात्मिक इस्तेमाल को देखते हुए यह कीमत कुछ भी नहीं है| धार्मिक कार्यों में गाय के गोबर से स्थान को पवित्र किया जाता है| गाय के गोबर से बने उपले से हवन कुंड की अग्नि जलाई जाती है| आज भी गांव में महिलाएं सुबह उठकर गाय के गोबर से घर के मुख्य द्वार को लीपती है| इंटरनेट पर आपको ऐसी कई वेबसाइट्स मिल जाएंगे जो सिर्फ गौ-उत्पाद, आपके द्वार तक पहुंचाने की सुविधा देती है| इन्हीं में से एक है,   www.gaukranti.org  इस साइट पर आपको गाय का गोबर और उससे बने उपले, साबुन, भगवान की मूर्तियां, ऑर्गेनिक पेंट, हवन के लिए धूप के अलावा परिष्कृत गोमूत्र भी उपलब्ध है| यह कंपनी अपना कच्चा माल गुजरात से लेकर भोपाल तक की लगभग 15 गौशालाओं से मंगवाती है| गाय के गोबर के उपलों का व्यापार और वैश्विक आकार ले चुका है| और खुदरा विक्रेताओं के पास इसकी डिलीवरी के लिए बड़े पैमाने पर आर्डर आ रहे हैं| तेजी से शहरी होती जा रही देश की आबादी के लिए अब यह सब दुर्लभ होता जा रहा है| यही वजह है कि देश और देश के बाहर खास अवसरों पर इन उपलों की मांग बढ़ रही है| इसलिए आप भी इसका बिजनेस शुरू कर सकते हैं| अगर आप गांव में रहते हैं तो आपको गोबर भी आसानी से मिल जाएगा| गोबर को ऑनलाइन बेचने के लिए आप या तो अपनी खुद की वेबसाइट जैसे - www.gaukranti.org बना सकते हैं| या फिर जो पॉपुलर वेबसाइट हैं जैसे कि www.ebay.com  , www.shopclues.com , Amazon.com  आदि वेबसाइट हैं| वहां पर सेलर बन कर बेच सकते हैं| सेलर बनने के लिए हर वेबसाइट की अलग-अलग डिमांड है, जिसे आप आसानी से पूरा कर सकते हैं| यह बात अलग है कि ये उपले बाजार में या आपके पड़ोस में ग्वाले से मिलने वाली उपलों से महंगी कीमत पर मिलेंगे| अपनी असली कीमत से करीब 5 गुना ज्यादा दाम पर मिलने वाले ऑनलाइन गोबर के कंडे ग्राहकों से ज्यादा ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट के लिए फायदे का सौदा है| इनसे आपको काफी मुनाफा हो सकता है| आदि आते हैं वहां पर सेलर बंद कर भेज सकते हैं शेर बनने के लिए हर वेबसाइट की अलग-अलग डिमांड है जिससे आप आसानी से पूरा कर सकते हैं यह बात अलग है कि यह प्ले बाजार में या आपके पड़ोस में ग्वालियर से मिलने वाली उपयोग से महंगी कीमत पर मिलेंगे अपनी असली कीमत से करीब 5 गुना ज्यादा दाम पर मिलने वाले ऑनलाइन गोबर के कंडे ग्राहकों से ज्यादा ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट के लिए फायदे का सौदा है इनसे आपको काफी मुनाफा हो सकता है

अब गाय के गोबर को बेचिए ऑनलाइन और बन जाइए लख...

May 03, 2018
गोबर से बने उपलों का उपयोग विभिन्न मांगलिक कार्यों में किया ही जाता है| यही वजह है कि ऑनलाइन बाजार में इसकी काफी मा [more]
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लखनऊ - केंद्र व प्रदेश सरकार किसानों को नई-नई तकनीकी और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देने के लिए पूरे देश में किसान कल्याण कार्यशाला आयोजित करने जा रही है| 2 मई को देश के सभी ब्लॉक मुख्यालयों पर इस कार्यशाला का आयोजन होगा| किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार ने ग्राम स्वराज अभियान के तहत इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है| इसमें पशुपालन विभाग, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य व मधुमक्खी पालन के अलावा कृषि से जुड़े सभी विभाग अपनी लाभकारी योजनाओं की जानकारी किसानों को देंगे| इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्रों पर तैनात कृषि वैज्ञानिक भी कार्यशाला में मौजूद रहकर किसानों को तकनीकी और एकीकृत खेती के बारे में बताएंगे| आईवीआरआई के प्रसार शिक्षा विभाग में प्रधान वैज्ञानिक डॉक्टर महेश चंद्र बताते हैं की - "सरकार किसान और वैज्ञानिकों को एक साथ लाने के लिए प्रयास कर रही है| इसलिए ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन लगातार किया जा रहा है|" इसमें वैज्ञानिक किसानों को नई तकनीकों, जिनसे उन्हें ज्यादा से ज्यादा लाभ हो इसके बारे में मदद कर सकेंगे|

2 मई को देश के सभी ब्लॉक मुख्यालयों में होगी...

Apr 27, 2018
लखनऊ – केंद्र व प्रदेश सरकार किसानों को नई-नई तकनीकी और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देने के लिए पूरे द [more]
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किसान भाइयों कृषि, पशुपालन तथा मौसम संबंधित ...

Apr 23, 2018
प्रिय किसान भाईयो कृषि, पशुपालन तथा मौसम सम्बंधित जानकारी के लिए रिलायंस फाउंडेशन के निःशुल्क हेल्पलाइन नंबर 18004198800 पर सोमवार से शनिवार सुबह 09:30 बजे से शाम 07:30 बजे के बीच संपर्क कर सकते हैं| [more]
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अधिक से अधिक लोग पढ़ लिखकर अच्छी नौकरी करना चाहते हैं| कभी आपने यह सुना है की पढ़ाई करने के बाद किसी ने बकरी पालन करना चाहता है| पशुपालन व खेती से तो हमारे युवा वैसे ही दूर भागते हैं| ऐसे में यह बात तो मजाक ही लगेगी| लेकिन ऐसा हुआ है और समाज में इस बदलाव की कहानी को लिखा है श्वेता तोमर ने, श्वेता ने किसी छोटे नहीं बल्कि एनआईएफटी जैसे देश के सर्वश्रेष्ठ फैशन डिजाइनिंग इंस्टिट्यूट से पढ़ाई की है| और अब वह उत्तराखंड के अपने गांव में बकरी पालन कर रही हैं| श्वेता का सफर 2015 से शुरू होता है| जब वह शादी करके अपने पति के साथ बेंगलुरु शिफ्ट हुई| वह पहले से एक सफल फैशन डिजाइनर थीं| बेंगलुरु आने के बाद वह घर पर खाली नहीं बैठना चाहती थी| बल्कि खुद का कोई काम शुरु करना चाहती थी| एक दिन श्वेता अपने पति के साथ एक बकरी का फॉर्म देखने गईं| वहां उन्होंने कुछ समय बिताया और उन्हें बहुत अच्छा लगा| वह खाली समय में अक्सर वहां जाने लगी| धीरे-धीरे फॉर्म में बकरी पालन की सारे नियम समझ लिए। श्वेता ने भी बकरी पालन करने का मन बना लिया था| एक गांव में जन्मी और पली-बढ़ी श्वेता को अच्छी तरह से पता था कि वह अपने इस शौक को इस शहर में नहीं पूरा कर सकती हैं| और इसलिए उन्होंने बेंगलुरु शहर की अपनी अच्छी-खासी लाइफस्टाइल को छोड़कर उत्तराखंड के देहरादून के पास रानी पोखरी जैसे छोटे से गांव में जाने का फैसला किया| उन्होंने अपने पति से जब यह बात बताई तो उन्होंने खुशी-खुशी श्वेता को यह काम करने के लिए स्वीकृति दे दी| श्वेता ने बकरी पालन शुरू करने के लिए अपनी सारी जमा-पूंजी उसमें लगा दी| यहां तक बिजनेस को अच्छे स्तर तक पहुंचाने के लिए बैंक से लोन भी लिया| श्वेता बताती हैं की - "उनके नजदीकी लोग उनके इस फैसले से हैरान थे| मेरी पढ़ाई और डिग्री को देखकर हर कोई सोचता था कि मुझे किसी बड़ी कंपनी में जॉब करनी चाहिए और अच्छे पैसे कमाने चाहिए| मेरा सब कुछ छोड़कर बकरी पालन करने का यह फैसला बिल्कुल गलत है, और गांव में कुछ नहीं रखा है करने को| हर नस्ल की बकरियां है फॉर्म में श्वेता ने अपना बिजनेस जिस जगह शुरू किया था| वहां बहुत से जंगली जानवरों के आने का खतरा भी रहता था| जो कभी भी बकरियों पर हमला कर सकते थे| लेकिन फिर भी श्वेता ने हार नहीं मानी और बैंक से लोन लेकर 250 बकरियों से बिजनेस शुरु कर दिया| इस समय श्वेता के फॉर्म में अलग-अलग प्रजातियों की सौ से  ज्यादा बकरियां पली है| इनमें सिरोही, बरबरी जमना पारी और तोता पारी ब्रीड के 5 हजार से लेकर 1 लाख तक के बकरे मौजूद है| श्वेता बकरी पालन में पूरी तरह पारंगत हो चुके हैं| बकरियों का दूध निकालने से लेकर उनकी देखभाल और छोटा मोटा इलाज सब वह खुद ही करती हैं| जरूरत पड़ने पर वह खुद ही बकरों को बिक्री के लिए लोडर पर लादकर मंडी ले जाती हैं| श्वेता के फॉर्म पर बकरियों की बिक्री इंटरनेट के माध्यम से भी होती है| श्वेता बताती है शुरुआत में सरकारी स्तर पर छोटी मोटी कई दिक्कतें आईं पर पशुपालन विभाग का सहयोग मिलता रहा| पिछले साल का टर्नओवर 25 लाख रुपए का था| अब अपना व्यवसाय शुरू करने के बाद दूसरों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण भी देती हैं|

देश के सर्वश्रेष्ठ इंस्टिट्यूट को छोड़ कर शु...

Apr 20, 2018
अधिक से अधिक लोग पढ़ लिखकर अच्छी नौकरी करना चाहते हैं| कभी आपने यह सुना है की पढ़ाई करने के बाद कोई बकरी पालन करना [more]
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हमेशा से अफवाह चलती आ रही है कि अंडा शाकाहारी होता है या मांसाहारी, इस बात का शायद कोई अंत नहीं है| लेकिन मेरठ के सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय में अनोखी रिसर्च चल रही है| यह रिसर्च आयुर्वेदिक अंडों को लेकर है| आयुर्वेदिक अंडों के उत्पादन की ओर कदम बढ़ाते हुए मेरठ की कृषि यूनिवर्सिटी ने संभावनाओं के कई द्वार खोले है| दावा है कि जहां ये अंडा अधिक स्वास्थ्यवर्धक होगा| वही किसानों की आय को दुगना कर के सरकार के अभियान को भी मजबूती देगा| विश्वविद्यालय कुक्कुट अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी डॉक्टर डीके सिंह का कहना है कि इस अंडे को आयुर्वेदिक अंडा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इस प्रक्रिया में मुर्गियों का जो आहार दिया जाता है, उसमें आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का मिश्रण होता है| सामान्य रूप से मुर्गियों का अंडा सफेद होता है| लेकिन इस प्रक्रिया में तैयार अंडा गुलाबीपन लिए हुए रहता है| मुर्गी का बाकायदा आहार चार्ट रहता है| जिसमें अनाज जैसे - मक्का, बाजरा, दाल की बजरी सहित जड़ी-बूटियों के मिश्रण का उपयोग होता है| मुर्गियों के आहार में कुल 15 तरीके की जड़ी-बूटियों का मिश्रण किया जाता है| इसमें सफेद मूसली, सतावर, कोंच, गोंद, शालब पंजा आदि शामिल है| हल्दी और लहसुन भी मुर्गियों को खिलाई जाती है| डॉक्टर डीके सिंह का कहना है कि आयुर्वेदिक अंडा किसानों की आय को दोगुना करने में अच्छा साधन बन सकता है|  प्रधानमंत्री का किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य भी इससे प्राप्त होगा| आमतौर पर मुर्गियों को दिए जाने वाले आहार में केमिकल युक्त उच्च प्रोटीन वाला आहार होता है| मुर्गियां कीड़े-मकोड़े भी खा लेती हैं| मुर्गियों को एंटीबायोटिक भी दी जाती है| ये एंटीबायोटिक मनुष्य में प्रतिरोधक क्षमता कम रखता है| मुर्गियों को स्ट्रॉयड के इंजेक्शन भी लगते हैं| ये अंडे मनुष्य के स्वास्थ्य पर कु-प्रभाव डालते हैं| आयुर्वेदिक अंडा प्राप्त करने की दिशा में ऐसी किसी चीज का उपयोग नहीं होता है| जो कि मनुष्य के स्वास्थ्य पर कु-प्रभाव न डालें| दक्षिण भारत के कुछ शहरों में आयुर्वेदिक अंडों का प्रयोग हुआ है| लेकिन नार्थ इंडिया में यह पहला अवसर है| जब अधिक अंडे पर सर्च हो रही है| आयुर्वेदिक अंडे की कीमत 23 से 24 रुपए तक हो सकती है| जबकि विश्वविद्यालय की हेचरी में से 12 से 15 रुपए में तैयार कर लिया जाएगा| आयुर्वेदिक अंडे में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है| जो मछलियों में पाया जाता है| यह मस्तिष्क और हृदय को भी स्वस्थ रखता है| एनीमिया और कुपोषण के शिकार से भी आयुर्वेदिक अंडा बचाएगा| आयुर्वेदिक अंडे से हड्डियां मजबूत होती हैं| और कैंसर की भी आशंका कम रहती है|

लो आ गया किसानों की आमदनी बढ़ाने वाला आयुर्व...

Apr 18, 2018
हमेशा से अफवाह चलती आ रही है कि अंडा शाकाहारी होता है या मांसाहारी, इस बात का शायद कोई अंत नहीं है| लेकिन मेरठ के स [more]
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अब शहर के लोग भी कर सकते हैं पशुपालन, रहने के लिए मिलेगा पेइंग गेस्ट (PG) हॉस्टल - गांव गुरु

अब शहर के लोग भी कर सकते हैं पशुपालन, रहने क...

Apr 05, 2018
हरियाणा में, फ्लैट में रहने वाले लोग भी अब गाय-भैंस पालने का शौक पूरा कर सकेंगे | हरियाणा सरकार शहरों के आसपास गाय [more]
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वैज्ञानिक तरीके से खेती

30th मार्च की दैनिक खेती की खबरें

Mar 31, 2018
दैनिक खेती की खबरें 1. वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर हो सकता है दोगुना लाभ : जिला कृषि कार्यालय में कृषि प्रौद्यो [more]
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बकरी पालन का व्यवसाय कर मेनका ने अपनी गरीबी को दूर किया - गांव गुरु

बकरी पालन का व्यवसाय कर मेनका ने अपनी गरीबी ...

Mar 23, 2018
गरीबी में पली-बढ़ी मेनका ने कहा कभी सोचा नहीं था कि बकरी पालन का व्यवसाय उनके दिन बदल सकते हैं| बकरी पालन का व्यवसा [more]
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किन वजहों से भेड़पालन फायदेमंद है? और क्यों ऊन उत्पादन के लिए भारत में भेड़पालन सर्वाधिक प्रचलन में है ?

किन वजहों से भेड़पालन फायदेमंद है? और क्यों ...

Mar 21, 2018
क्यों,  भेड़पालन फायदेमंद है भारत में भेड़ पालन काफी समय से किया जाता है | बताया जाता है विदेशों में कई प्रकार की स [more]
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जानिए कौन सी नस्ल की बकरी को पाल कर आप मालामाल हो सकते हैं? – गांव गुरु

जानिए कौन सी नस्ल की बकरी को पाल कर आप मालाम...

Mar 21, 2018
किसान भाइयों सिरोही नाम की बकरी व्यवसाय के लिहाज से काफी फायदे का सौदा माना जाता है| अगर आप सही ढंग से चारा खि‍लाएं [more]
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पंतनगर में मत्स्य पालन की संपूर्ण जानकारी पाकर किसान हुए लाभान्वित – गांव गुरु

पंतनगर में मत्स्य पालन की संपूर्ण जानकारी पा...

Mar 21, 2018
किसान भाइयों पंतनगर विश्वविद्यालय के मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय द्वारा बिहार राज्य के पूर्वी चंपारण जिले के 30 प्रग [more]
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वैज्ञानिक विधि से करें पशुओं के चारे का भंडारण - गांव गुरु

वैज्ञानिक विधि से करें पशुओं के चारे का भंडा...

Mar 10, 2018
पशुओं से ज्यादा दूध उत्पादन प्राप्त करने के लिए हमें पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक चारे की आवश्यकता होती है| इन चारों [more]
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