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Category Archives: तकनीक

प्याज मुख्य रूप से सब्जी की प्रमुख फसल है| और कभी-कभी प्याज कौड़ियों के दाम पर बिकने को मजबूर हो जाता है| जिससे किसानों को ज्यादा मुनाफा नहीं मिल पाता है| किसानों को उनके प्याज की सही कीमत मिले| इसके लिए राजविंदर सिंह राणा ने एक नई तकनीक ईजाद की है| राजविंदर पंजाब के लुधियाना जिले के मदियानी गांव में रहते हैं| उन्होंने देखा कि कई बार जब प्याज हल्का सड़ने लगता है| तो किसानों को उसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता है| राजविंदर ने समस्या का हल निकालने के लिए इस विषय पर शोध किया है| उन्होंने 'एग ट्रे’ में प्याज रखकर सप्ताह में दो बार पानी का छिड़काव किया| इसके बाद उससे हरी पत्ती वाला प्याज निकलने लगा| राजविंदर बताते हैं कि 1 किलो प्याज में जितने गुण पाए जाते हैं, उतने ही गुण 1 हरे पत्ते वाले प्याज में पाए जाते हैं| वैसे तो इस तकनीक का इस्तेमाल हम उस समय कर सकते हैं| जब हमारे पास मिट्टी का कोई साधन ना हो| लेकिन अभी मैंने इसका इस्तेमाल अपनी किचन में किया है| इस प्याज का इस्तेमाल हम रोजाना कर सकते है| ये वर्षों चलने वाली प्रक्रिया है| इससे हमारे घर में हल्का खराब हो रहा प्याज प्रयोग में आ जाएगा|  राजविंदर आगे बताते हैं कि इस प्रक्रिया में किसानों के प्याज का उन्हें सही दाम भी मिलेगा| साथ ही अगर कोई इस हरे प्याज को बाजार में बेचना चाहेगा| तो उस समय बाजार भाव के हिसाब से 40-60 रुपए आसानी से कमाए जा सकते हैं| आप भी अपनी रसोई में खाली 'एग ट्रे' में घर में हल्की खराब हो रहे प्याज को एग ट्रे के खानों में भरकर रख सकते हैं| सप्ताह में दो बार हल्के पानी का इसमें छिड़काव करें| इसमें हर सप्ताह में 2 बार पानी को डालते रहें| जिससे यह हरा बना रहेगा| इस तकनीक से घर में खराब हो रहे प्याज का सही से प्रयोग कर सकते हैं|

करिए कुछ ऐसा उपाय की, सड़ा प्याज भी देगा अधि...

May 04, 2018
प्याज मुख्य रूप से सब्जी की प्रमुख फसल है| और कभी-कभी प्याज कौड़ियों के दाम पर बिकने को मजबूर हो जाता है| जिससे किस [more]
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गोबर से बने उपलों का उपयोग विभिन्न मांगलिक कार्यों में किया ही जाता है| यही वजह है कि ऑनलाइन बाजार में इसकी काफी मांग बढ़ी है| गाय के गोबर से लेकर उससे बना उपला जिसे गोइठा और कंडा भी कहते हैं| ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर अपनी जगह बना चुका है| ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स इन कंडों को भी शानदार पैकिंग मे करके होम डिलीवरी करा रही है| www.ebay.com , www.shopclues.com , www.gaukranti.org , Amazon.com  आदि कई साइट्स पर कंडे बिक रहे हैं| जहां आर्डर करने पर कुछ ही दिनों में उसकी डिलीवरी हो जाएगी|  यही नहीं ग्राहकों की सहूलियत के लिए कई साइट्स पर इन उपलों के आकार और वजन का भी ब्यौरा मौजूद है| इन साइट्स पर एक दर्जन उपलों का मूल्य 100 से लेकर 300 रुपये तक है| दो दर्जन मंगवाने पर डिस्काउंट दिया जा रहा है| त्यौहारी मौसम में इन उपलों पर कई डिस्काउंट ऑफर भी दिए जाते हैं| यहां आपको उपलों की कीमत भले ही थोड़ी ज्यादा लगे| लेकिन इसके आध्यात्मिक इस्तेमाल को देखते हुए यह कीमत कुछ भी नहीं है| धार्मिक कार्यों में गाय के गोबर से स्थान को पवित्र किया जाता है| गाय के गोबर से बने उपले से हवन कुंड की अग्नि जलाई जाती है| आज भी गांव में महिलाएं सुबह उठकर गाय के गोबर से घर के मुख्य द्वार को लीपती है| इंटरनेट पर आपको ऐसी कई वेबसाइट्स मिल जाएंगे जो सिर्फ गौ-उत्पाद, आपके द्वार तक पहुंचाने की सुविधा देती है| इन्हीं में से एक है,   www.gaukranti.org  इस साइट पर आपको गाय का गोबर और उससे बने उपले, साबुन, भगवान की मूर्तियां, ऑर्गेनिक पेंट, हवन के लिए धूप के अलावा परिष्कृत गोमूत्र भी उपलब्ध है| यह कंपनी अपना कच्चा माल गुजरात से लेकर भोपाल तक की लगभग 15 गौशालाओं से मंगवाती है| गाय के गोबर के उपलों का व्यापार और वैश्विक आकार ले चुका है| और खुदरा विक्रेताओं के पास इसकी डिलीवरी के लिए बड़े पैमाने पर आर्डर आ रहे हैं| तेजी से शहरी होती जा रही देश की आबादी के लिए अब यह सब दुर्लभ होता जा रहा है| यही वजह है कि देश और देश के बाहर खास अवसरों पर इन उपलों की मांग बढ़ रही है| इसलिए आप भी इसका बिजनेस शुरू कर सकते हैं| अगर आप गांव में रहते हैं तो आपको गोबर भी आसानी से मिल जाएगा| गोबर को ऑनलाइन बेचने के लिए आप या तो अपनी खुद की वेबसाइट जैसे - www.gaukranti.org बना सकते हैं| या फिर जो पॉपुलर वेबसाइट हैं जैसे कि www.ebay.com  , www.shopclues.com , Amazon.com  आदि वेबसाइट हैं| वहां पर सेलर बन कर बेच सकते हैं| सेलर बनने के लिए हर वेबसाइट की अलग-अलग डिमांड है, जिसे आप आसानी से पूरा कर सकते हैं| यह बात अलग है कि ये उपले बाजार में या आपके पड़ोस में ग्वाले से मिलने वाली उपलों से महंगी कीमत पर मिलेंगे| अपनी असली कीमत से करीब 5 गुना ज्यादा दाम पर मिलने वाले ऑनलाइन गोबर के कंडे ग्राहकों से ज्यादा ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट के लिए फायदे का सौदा है| इनसे आपको काफी मुनाफा हो सकता है| आदि आते हैं वहां पर सेलर बंद कर भेज सकते हैं शेर बनने के लिए हर वेबसाइट की अलग-अलग डिमांड है जिससे आप आसानी से पूरा कर सकते हैं यह बात अलग है कि यह प्ले बाजार में या आपके पड़ोस में ग्वालियर से मिलने वाली उपयोग से महंगी कीमत पर मिलेंगे अपनी असली कीमत से करीब 5 गुना ज्यादा दाम पर मिलने वाले ऑनलाइन गोबर के कंडे ग्राहकों से ज्यादा ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट के लिए फायदे का सौदा है इनसे आपको काफी मुनाफा हो सकता है

अब गाय के गोबर को बेचिए ऑनलाइन और बन जाइए लख...

May 03, 2018
गोबर से बने उपलों का उपयोग विभिन्न मांगलिक कार्यों में किया ही जाता है| यही वजह है कि ऑनलाइन बाजार में इसकी काफी मा [more]
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प्रधानमंत्री मोदी के स्टार्टअप योजना के तहत केरल सिवा पुरम के सेंट थॉमस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के छात्रों ने खेती-बाड़ी के कई कामों को एक साथ अंजाम देने वाली ऐसी अद्भुत मशीन तैयार की है| जो किसानों के लिए और खेती बाड़ी के क्षेत्र में वरदान साबित हो सकती है| साथ ही साथ यह कृषि से संबंधित आने वाले खर्च में कमी लाएगी| छात्रों ने इस मशीन को "मन्नीरा" नाम दिया है| "मन्नीरा" एक साथ जुताई, रोपाई, सिंचाई, कटाई, सूप, पिसाई यह सारे काम कर सकती है| इस मशीन को बनाने का एकमात्र मकसद लागत को कम करके मुनाफा डबल करना है| और हमें उम्मीद है कि यह मशीन कृषि क्षेत्र में एक क्रांति लाएगी| जब 10 एकड़ की जमीन पर 5 साल के अंतराल में यही सारे कार्य अलग-अलग मशीनों द्वारा किए किए गए| तो लागत लगभग 27,08,500 रुपए रही, वही "मन्नीरा" का उपयोग किया तो यह लागत गिरकर 6,20,500 आ गई| इस मशीन को बड़ी उपलब्धि बताते हुए छात्रों ने कहा कि अगर अंतिम निरीक्षण के बाद इसका चयन हो जाता है| तो हमें 2 लाख का अनुदान मिलेगा| गौर करने वाली बात यह है कि इस मशीन को बनाने की कीमत भी 2 लाख रूपये की ही है|

आ गया एक ऐसा मशीन जो जुताई से लेकर पिसाई तक ...

Apr 30, 2018
प्रधानमंत्री मोदी के स्टार्टअप योजना के तहत केरल सिवा पुरम के सेंट थॉमस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के छात्रों ने खेती-बाड [more]
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विशुनपुर (बाराबंकी) - अब गांव के लोगों को गेहूं लेकर गांव से दूर जाने जाने की जरूरत नहीं होगी| बदलते दौर में अब आटा पीसने की मशीन घर पर पहुंच रही है| जिसके चलते जहां लोगों को काफी सुविधा हुई वही समय की भी बचत हो रही है| यह मशीन बिहार नगर के अर्जुन ने बनाई है| अर्जुन बताते हैं कि - "आटा पीसने की मशीन ट्रैक्टर से चलती है| यह मशीन लगभग 75 हजार की आती है| ट्रैक्टर मिलाकर इस कार्य को करने के लिए 5 से 6 रुपए लाख का खर्चा आ जाता है| गांव-गांव आटा पीसने के लिए निकल जाते हैं| गांव में जो गेहूं पिसवाने बुलाता है, उसके दरवाजे पर जाकर गेहूं की पिसाई करते हैं|" और आगे बताते हैं कि - "मशीन की मदद से 1 घंटे में लगभग ढाई कुंटल गेहूं की पिसाई हो जाती है| इसके लिए हम 1 रुपए प्रति किलो की दर से मूल्य लेते हैं| व 20 किलो पर एक किलो आटे के रूप में जलन (एक किलो आटा रख लिया जाता है) ली जाती है। सहालक के समय अच्छा काम निकलता है।" जिला मुख्यालय से लगभग 22 किमी दूर सालेहनगर के ग्रामीण प्रदीप पाल बताते हैं कि - "घर-घर आटा पीसने वाली मशीन आने से हमें बहुत फायदा हुआ| क्योंकि पहले घर में आटा खत्म होने से काफी पहले ही हमें आटा पिसवाने के लिए समय निकालना पड़ता था| लेकिन अब घर की महिलाएं ही यह काम कर लेती हैं|

अब घर-घर पहुंचती है, गेहूं पीसने की पोर्टेबल...

Apr 26, 2018
विशुनपुर (बाराबंकी) – अब गांव के लोगों को गेहूं लेकर गांव से दूर जाने जाने की जरूरत नहीं होगी| बदलते दौर में [more]
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लखनऊ  - भारत में आज भी ऐसे कई गांव हैं, जहां बिजली अब तक नहीं पहुंच सकी है| गांव में लोग आज भी लालटेन और दीए की रोशनी में जीवन का गुजर-बसर कर रहे हैं| इन गांवों के लोगों ने वर्षों से अपने गांव में बिजली की रोशनी तक नहीं देखी है| मगर केरल के रहने वाले दो भाइयों ने एक ऐसा अविष्कार किया है| जिससे गांव-गांव में बहुत ही कम लागत में न सिर्फ बिजली पहुंच सकेगी, बल्कि गांव के लोग जिंदगी भर तक अपने घर को रोशन रख सकेंगे| तो आइए आज आपको बताते हैं कि केरल के इन दोनों भाइयों के आविष्कार के बारे में - भारत जैसे देश के लिए बहुत उपयोगी खोज असल में, केरल के रहने वाले अवंत गद्दे इनोवेंशस के संस्थापक अरुण और अनूप जॉर्ज ने बेहद कम लागत में एक ऐसी पवनचक्की विकसित है| जिससे बिजली उत्पन्न की जा सकती है| कमाल कि बात यह है कि इस पवन चक्की के जरिये न सिर्फ आपके पूरे घर को बिजली मिल सकेगी, बल्कि इस पवन चक्की से जिंदगी भर आपके घर को रोशनी मिल सकती है। ऐसे में यह खोज भारत जैसे देश के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है। यह पवन चक्की एक पंखे के साइज के बराबर है| और इस पवन चक्की की कीमत 750 अमेरिकी डॉलर यानी मात्र  50 हजार रुपए तक है यानी इस उपकरण को लेने के लिए आपको मात्र 50 हजार रुपए की धनराशि खर्च करनी होगी| असल में यह पवनचक्की रोजाना 3 से 5 किलोवाट प्रति घंटा बिजली पैदा करती है| एक तरह से देखा जाए तो जीवन भर की बिजली के लिए यह कीमत भी बहुत ज्यादा नहीं है| दोनों भाइयों का कहना है कि इससे पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर नहीं पड़ेगा| हम देश के बिजली संकट को को दूर करना चाहते हैं एक अंग्रेजी वेबसाइट के साक्षात्कार के दौरान दोनों भाइयों ने बताया कि हम देश के बिजली संकट को दूर करना चाहते हैं| हमारा लक्ष्य ऊर्जा गरीबी को खत्म करने के साथ संघर्ष कर रहे राज्यों के पावरग्रिड पर निर्भरता को कम करना और जरूरतमंदों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है| इसलिए अंतर रखता है महत्व अरुण जार्जिस की माने तो जब एक छोटी पवन चक्की 1 किलो वाट ऊर्जा उत्पन्न करती है तो इसका खर्च करीब 3 से 7 लाख रुपये आता है| मगर इस पवन चक्की को लेने के लिए आपको सिर्फ 50 हजार रुपए की धनराशि खर्च करनी होगी| ऐसे में निश्चित रूप से जीवन भर आप को बिजली देने के लिए इस उपकरण की कीमत ज्यादा नहीं है| फिलहाल यह पवन चक्की बाजार में अभी लॉन्च नहीं की गई है| लेकिन बहुत ही जल्दी से मार्केट में लांच किए जाने की उम्मीद की जा रही है| केरल के इन दोनों भाइयों की खोज पर अगर सरकार अमल करती है| तो पूरे देश को बिजली मिल सकती है| फिलहाल सरकार इस दिशा में अभी विचार कर रही है| क्या है भारत की स्थिति ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल की मानें तो भारत वैश्विक पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के मामले में चीन, अमेरिका और जर्मनी के बाद चौथे स्थान पर आता है।

दो भाइयों ने मिलकर कर दिया कमाल का आविष्कार,...

Apr 25, 2018
लखनऊ  – भारत में आज भी ऐसे कई गांव हैं, जहां बिजली अब तक नहीं पहुंच सकी है| गांव में लोग आज भी लालटेन और दीए [more]
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किसान भाइयों टमाटर उगाने की एक नई अत्याधुनिक विधि विकसित की गई है| जिससे टमाटर की उपज प्रति वर्ग मीटर में 60 किलो तक प्राप्त की जा सकती है| राजस्थान के बस्सी में ढिढोला फॉर्म पर यह तकनीक अपनाई जाएगी| इस दौरान बताया जा रहा है कि ढिढोला फॉर्म पर सिर्फ पानी के वाष्प से ही टमाटर को उगाया जाएगा| इसके लिए राज्य सरकार भी 13 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान करने का दावा कर रही है| फॉर्म के वरिष्ठ योगेश कुमार वर्मा का कहना है कि इस विधि से पानी के वाष्प में पोषक तत्वों को घोलकर पाइपों द्वारा वाष्प छोड़ी जाएगी| जिसे पौधे ग्रहण कर वृद्धि कर सकेंगे| उन्होंने बताया कि इसी वर्ष सितंबर-अक्टूबर में टमाटर उगाना शुरू किया जाएगा| जिसके सफल हो जाने के बाद किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा| उल्लेखनीय है कि यह देश में इस तरह का होने वाला प्रथम प्रयोग है|  इस प्रकार दावा किया जा रहा है कि टमाटर उगाने के इस विधि से 11 महीने तक टमाटर की उपज मिलेगी और आने वाले समय में राजस्थान में टमाटर की कमी नहीं होगी| और किसानों को उनकी उपज के बदले सही दाम मिल पाएंगे| इस प्रयोग के लिए भूमि का पहचान कर वहां मिट्टी और पानी की जांच का अध्ययन किया जा चुका है| जिसके फलस्वरुप कार्य शुरू किया जाएगा| इस दौरान संस्थान का मानना है कि जिन किसानों के पास भूमि बहुत सीमित मात्रा में है उन किसानों के लिए टमाटर उगाने की यह विधि काफी कारगर साबित होगी|

इस जगह पर उगेगा टमाटर, वह भी बिना मिट्टी और ...

Apr 21, 2018
किसान भाइयों टमाटर उगाने की एक नई अत्याधुनिक विधि विकसित की गई है| जिससे टमाटर की उपज प्रति वर्ग मीटर में 60 किलो त [more]
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अक्सर यह देखा गया है कि किसी भी क्षेत्र की अधूरी जानकारी रखने पर हम उस क्षेत्र में तरक्की नहीं कर पाते हैं| इसलिए पूरी जानकारी का होना बहुत ही अनिवार्य है| किसान भाइयों के लिए राज्य सरकार कई सारी योजनाएं निकालती है| लेकिन उस योजना की जानकारी ना होने के कारण किसान भाई उसका लाभ नहीं उठा पाते हैं| किसानों की खाद, बीज और पानी से लेकर लोन सहित अन्य समस्याओं की सुनवाई टोल फ्री नंबर 18002331850 व 18001801551 पर होगी| किसान मितान केंद्र के लिए सरकार ने यह टोल फ्री नंबर जारी किया है| इसके साथ ही किसानों की समस्या सुनने के लिए कृषि विभाग के अफसरों की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है| विभाग ने बकायदा ड्यूटी पर रहने वाले अफसरों का मोबाइल नंबर जारी किया है| किसान उनके नंबर पर सीधे कॉल कर सकते हैं| और संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं| कृषि विभाग के उप-संचालक ने बताया कि किसान, खेती किसानी के साथ ही राजस्व सहकारिता, ऊर्जा एवं जल संसाधन विभाग से संबंधित जानकारी भी मितान केंद्र के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं| मितान केंद्र में आने वाले किसानों की समस्या गौर से सुनने की नसीहत अफसरों को दी गई है| कहा गया है कि - "उपलब्ध योजनाओं के आधार पर उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए आश्वस्त करते हुए जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाए| आने वाले किसानों और उनकी समस्याओं का रिकॉर्ड रखने और उनकी समस्याओं की जानकारी संबंधित विभाग के जिला-स्तर के प्रमुख अधिकारी को भेजने के निर्देश दिए गए हैं|" किसान मितान केंद्र के अफसरों के नंबर नोडल अफसर आरके परगनिया सहायक संचालक 98271 04237 बीआर धृतलहरे विकास अधिकारी 90095 39911 बीके टिकरिहा कृषि अधिकारी 93008 34514 बुधवार व गुरुवार पूनम चौहान कृषि विस्तार अधिकारी 97550 42526 आरके साहू कृषि विस्तार अधिकारी 97548 67078 शुक्रवार वीके श्रीवास्तव कृषि विस्तार अधिकारी 83052 25653 कमला गंधर्व कृषि विस्तार अधिकारी 78040 27751 शनिवार हिमाचल मोटघरे व श्री नवनीत मिश्रा 98286 54060 सभी दिन विजय ठाकुर कृषि विस्तार अधिकारी 94064 05551

किसान भाई बीज, खाद और लोन लेने के लिए इस नंब...

Apr 19, 2018
अक्सर यह देखा गया है कि किसी भी क्षेत्र की अधूरी जानकारी रखने पर हम उस क्षेत्र में तरक्की नहीं कर पाते हैं| इसलिए प [more]
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हमेशा से अफवाह चलती आ रही है कि अंडा शाकाहारी होता है या मांसाहारी, इस बात का शायद कोई अंत नहीं है| लेकिन मेरठ के सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय में अनोखी रिसर्च चल रही है| यह रिसर्च आयुर्वेदिक अंडों को लेकर है| आयुर्वेदिक अंडों के उत्पादन की ओर कदम बढ़ाते हुए मेरठ की कृषि यूनिवर्सिटी ने संभावनाओं के कई द्वार खोले है| दावा है कि जहां ये अंडा अधिक स्वास्थ्यवर्धक होगा| वही किसानों की आय को दुगना कर के सरकार के अभियान को भी मजबूती देगा| विश्वविद्यालय कुक्कुट अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी डॉक्टर डीके सिंह का कहना है कि इस अंडे को आयुर्वेदिक अंडा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इस प्रक्रिया में मुर्गियों का जो आहार दिया जाता है, उसमें आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का मिश्रण होता है| सामान्य रूप से मुर्गियों का अंडा सफेद होता है| लेकिन इस प्रक्रिया में तैयार अंडा गुलाबीपन लिए हुए रहता है| मुर्गी का बाकायदा आहार चार्ट रहता है| जिसमें अनाज जैसे - मक्का, बाजरा, दाल की बजरी सहित जड़ी-बूटियों के मिश्रण का उपयोग होता है| मुर्गियों के आहार में कुल 15 तरीके की जड़ी-बूटियों का मिश्रण किया जाता है| इसमें सफेद मूसली, सतावर, कोंच, गोंद, शालब पंजा आदि शामिल है| हल्दी और लहसुन भी मुर्गियों को खिलाई जाती है| डॉक्टर डीके सिंह का कहना है कि आयुर्वेदिक अंडा किसानों की आय को दोगुना करने में अच्छा साधन बन सकता है|  प्रधानमंत्री का किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य भी इससे प्राप्त होगा| आमतौर पर मुर्गियों को दिए जाने वाले आहार में केमिकल युक्त उच्च प्रोटीन वाला आहार होता है| मुर्गियां कीड़े-मकोड़े भी खा लेती हैं| मुर्गियों को एंटीबायोटिक भी दी जाती है| ये एंटीबायोटिक मनुष्य में प्रतिरोधक क्षमता कम रखता है| मुर्गियों को स्ट्रॉयड के इंजेक्शन भी लगते हैं| ये अंडे मनुष्य के स्वास्थ्य पर कु-प्रभाव डालते हैं| आयुर्वेदिक अंडा प्राप्त करने की दिशा में ऐसी किसी चीज का उपयोग नहीं होता है| जो कि मनुष्य के स्वास्थ्य पर कु-प्रभाव न डालें| दक्षिण भारत के कुछ शहरों में आयुर्वेदिक अंडों का प्रयोग हुआ है| लेकिन नार्थ इंडिया में यह पहला अवसर है| जब अधिक अंडे पर सर्च हो रही है| आयुर्वेदिक अंडे की कीमत 23 से 24 रुपए तक हो सकती है| जबकि विश्वविद्यालय की हेचरी में से 12 से 15 रुपए में तैयार कर लिया जाएगा| आयुर्वेदिक अंडे में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है| जो मछलियों में पाया जाता है| यह मस्तिष्क और हृदय को भी स्वस्थ रखता है| एनीमिया और कुपोषण के शिकार से भी आयुर्वेदिक अंडा बचाएगा| आयुर्वेदिक अंडे से हड्डियां मजबूत होती हैं| और कैंसर की भी आशंका कम रहती है|

लो आ गया किसानों की आमदनी बढ़ाने वाला आयुर्व...

Apr 18, 2018
हमेशा से अफवाह चलती आ रही है कि अंडा शाकाहारी होता है या मांसाहारी, इस बात का शायद कोई अंत नहीं है| लेकिन मेरठ के स [more]
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पुराने जमाने में बुजुर्ग लोग कहा करते थे कि - "एक वक्त ऐसा आएगा इंसान सब काम एक ही स्थान पर बैठे हुए करेगा, बुजुर्गों की पुरानी कहावतें आज सच होती जा रही हैं| तकनीक ने इतनी तेजी से संसार को जकड़ा है कि हर एक काम आसान हो गया है|" पहले किसान खेत को सींचने के लिए दो-दो दिन खेत में रहा करते थे| ताकि उसका खेत पूरी तरह से सींच जाए| लेकिन अब किसान अपने घर बैठे आसानी से सिर्फ एक यंत्र के जरिए खेत की सिंचाई कर सकता है| जी हां यह संभव है| ओस्सियन एग्रो कंपनी नैनो गणेश के नाम से किसानों के लिए एक उत्पाद उपलब्ध करा रही हैं| इस उपकरण के माध्यम से किसान आसानी से घर बैठे अपने समबर्सिबल चला सकता है| यानी कि जब किसान को खेत में सिंचाई की जरूरत पड़े तो घर पर बैठे हुए समबर्सिबल को चालू कर सकता है, और बंद कर सकता है| इस ऑटोमेटिक स्विच को मोबाइल से कनेक्ट कर दिया जाता है| तो किसान आसानी से मोटर को फोन के माध्यम से ओंन और ऑफ दोनों कर सकता है| यहां तक कि यदि किसान को लग रहा है कि मोटर में कोई प्रॉब्लम है तो उसको आसानी से इस यंत्र के माध्यम से अलर्ट मिल जाता है| यह एक बहुत ही अत्याधुनिक यंत्र है| इससे किसान काफी फायदा ले रहा है| मशीन संबंधी जानकारी के लिए संपर्क करें: मिस्टर जयन 022-24234477 022-24472277

किसानों को मिला सबसे बड़ी टेंशन से छुटकारा, ...

Apr 17, 2018
पुराने जमाने में बुजुर्ग लोग कहा करते थे कि – “एक वक्त ऐसा आएगा इंसान सब काम एक ही स्थान पर बैठे हुए कर [more]
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भारत एक कृषि प्रधान देश है| यहां भिन्न-भिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं| जिनमें सब्जी वर्ग की फसलों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है| सब्जी उत्पादन में भारत का चीन के बाद दूसरा स्थान है| सब्जी वर्ग की फसलों में देखा जाए तो टमाटर अपनी अहम भूमिका निभाता है| उत्पादन की दृष्टि से टमाटर एक महत्वपूर्ण सब्जी की फसल है| जो कि सब्जी व फल दोनों प्रकार से काम में आता है| अगर पाला नहीं पड़े तो टमाटर की फसल वर्षभर उगाई जा सकती है| टमाटर मैं मुख्य रूप से विटामिन ए व सी पाया जाता है| इसका उपयोग ताजे फल के रूप में या उन्हें पकाकर डिब्बाबंदी करके अचार, चटनी, सूप बनाकर व अन्य सब्जियों के साथ पकाकर भी किया जा सकता है| टमाटर की फसल में कई प्रकार के कीड़ों का आक्रमण होता है| जिनकी सही समय का पहचान करके प्रबंधन किया जाए तो वाकई किसान भाइयों को लाभ मिलेगा| टमाटर में लगने वाले कीट निम्न प्रकार हैं- नर्सरी में पौधों को कीड़ों के प्रकोप से बचाने के लिए मोनोक्रोटोफॉस 36 एस.एल. एक मिलीलीटर तथा साथ में जाइनेब या मैन्कोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोलकर छिड़काव करें| सफेद लट: यह कीट टमाटर की फसल को काफी नुकसान पहुंचाता है| इस कीट की लटें पौधे की जड़ों को खाती हैं| इसके प्रकोप से पौधा सूख कर मर जाता है| प्रबंधन: बुवाई वाले खेत में फसल चक्र अपनाना चाहिए| वयस्क कीट प्रकाश प्रपंच के ऊपर भारी संख्या में आकर्षित होते हैं| अतः इसका प्रयोग करना चाहिए| इस कीट के वयस्क पेड़ पौधों पर भारी संख्या में बैठे रहते हैं| जिनको हाथ या किसी लकड़ी से छलका कर उन्हें इकट्ठा करके जमीन में दबा दें या फिर केरोसीन युक्त पानी में डालकर मार दें| इस कीट के नियंत्रण हेतु फोरेट 10 जी 25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से रोपाई से पूर्व कतारों में पौधों की जड़ों के पास डालें| फल छेदक: इस कीट का वयस्क भूरे रंग का तथा लट हरे रंग की होती हैं| इस कीट की सबसे हानिकारक अवस्था ही लट होती है| लट शुरू में मुलायम पत्तों पर हमला करती है| तथा बाद में फलों पर आक्रमण करती है| एक लट 2-8 फल नष्ट करने में सक्षम होती है| ऐसे फल उपभोक्ताओं द्वारा पसंद नहीं किए जाते हैं| बाजार में अच्छे भाव भी नहीं मिलते हैं| फल पर किए गए छेद गोल होते हैं| आक्रमण हरे फलों पर अधिक होता है| जिससे अम्लता बढ़ जाती है| और ये फल धीरे-धीरे कम पसंद किए जाते हैं| प्रबंधन: 40 दिन पुराने अमेरिकी लंबा गेंदा और 25 दिन पुरानी टमाटर की पौध को 1:16 के अनुपात में पंक्तियों में एक साथ बोयें| मादा पतंगे अण्डे देने के लिए गेंदे की ओर आकर्षित होती है| प्रकाश जाल की स्थापना से वयस्क पतंगों को मारने के लिए आकर्षित किया जा सकता है| इस कीट संबंधित फेरोमोन ट्रेप एक हेक्टेयर में 12 लगाने चाहिए| क्षतिग्रस्त फलों को इकट्ठा करके नष्ट कर देना चाहिए| प्रारंभिक दौर लार्वा को मारने के लिए 5%  नीम के बीज गिरी के तेल का छिड़काव करें| प्रति हेक्टेयर (‘टी’ आकार के) 15-20 पक्षियों के बैठने के लिए रखना चाहिए| जो कीट भक्षी पक्षियों को आमंत्रित करने में मदद करता है| फल छेदक से संरक्षण के लिए एन.पी.वी. 250 एल.ई./ हेक्टेयर के साथ-साथ 20 ग्राम / लीटर गुड़ का  10 दिनों के अंतराल पर छिड़काव भी लाभदायक होता हैं| मैलाथियान 50 cc एक मिली मीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए| सफेद मक्खी: एक छोटा सा सफेद रंग का कीट होता है| इसके प्रोढ़ व निम्फ दोनों ही पौधे का रस चुसकर नुकसान करते हैं| इसके द्वारा अर्क चूसने और संयंत्र पोषक तत्वों को हटाने के कारण पौधे कमजोर हो जाते हैं| अगर पौधों के आसपास पानी भरा हुआ है तो नुकसान और अधिग गंभीर भी हो सकता है| सफेद मक्खी बायोटाइप 'बी' टमाटर पत्ती कर्ल वायरस के संक्रमण और संचालित होने से फसल को पूर्णरूप से नुकसान होने का खतरा हो जाता है| प्रबंधन: वयस्क को आकर्षित करने के लिए एक हेक्टेयर में 12 पीले रंग के येलो कार्ड लगाने चाहिए| सफेद मक्खी पत्ती कर्ल वायरस के प्रचार करने में वेक्टर के रूप में कार्य करती हैं| सभी प्रभावित पौधों को आगे प्रसार से बचाने के लिए उखाड़ कर निकाल देना चाहिए| नीम की निंबोली या पत्तियों से तैयार 5% नीम के अर्क का छिड़काव करें| 7 पत्ती युक्त बना जीवामृत का छिड़काव करें| आक, धतुरा, नीम, करंज आदि की पत्तियों से तैयार वनस्पति काढे का छिड़काव करें| एसीफेट 75 एस.पी. 2 ग्राम या ऐसीटामिप्रिड 20 एस.पी. 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें| माहू: यह नरम शरीर नाशपाती के आकार का पंखों वाला या पंखहीन कीट होता है| झुंड में रहकर रस चुसना, मलिनकिरण या पत्ते को मोड़ना तथा शहद्नुमा पदार्थ छोड़ना इसकी पहचान होती है| प्रबंधन: वयस्क को आकर्षित करने के लिए एक हेक्टेयर में कम से कम 12 पीले रंग के येलो कार्ड लगाने चाहिए| नीम की निंबोली या पत्तियों से तैयार 5% नीम के अर्क का छिड़काव करें| 7 पत्ती युक्त बना जीवामृत का छिड़काव करें| आक, धतुरा, नीम, करंज आदि की पत्तियों से तैयार वनस्पति काढे का छिड़काव करें| डाइमेथोएट 30 ई.सी. एक मिली या थायामिथोक्जाम 25 डब्ल्यू.जी. 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए| हरा तेला: यह हरे रंग का नरम शरीर वाला हेलीकॉप्टर के आकार का कीट होता है| यह पत्ती की निचली सतह पर रहता है तथा हमेशा टेढ़ा चलता है| प्रबंधन: नीम की निंबोली या पत्तियों से तैयार 5% नीम के अर्क का छिड़काव करें| 7 पत्ती युक्त बना जीवामृत का छिड़काव करें| आक, धतुरा, नीम, करंज आदि की पत्तियों से तैयार वनस्पति काढे का छिड़काव करें| थायामिथोक्जाम 25 डब्ल्यू.जी. 0.4 ग्राम या या डाइमेथोएट 30 ई सी 1 मिली /लीटर की दर से छिड़काव करना चाहिए| ऐसीफेट 75 एस.पी. 2 ग्राम या ऐसीटामिप्रिड 20 एस.पी. 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए| सुत्रकृमी: इसकी वजह से टमाटर की जड़ों में गांठ पड़ जाती है| तथा पौधों की बढ़वार रुक जाती है जिससे उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है| प्रबंधन: रोपाई से पूर्व 25 किलो कार्बोफ्यूरान 3G प्रति हेक्टेयर की दर से भूमि में मिलाएं या पौधे की रोपाई के समय जड़ों के पास 8-10 कण डालकर रोपाई करें| gaonguru.com

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