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बकरी पालन का व्यवसाय कर मेनका ने अपनी गरीबी को दूर किया – गांव गुरु

Posted by Pramod on March 23, 2018
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गरीबी में पली-बढ़ी मेनका ने कहा कभी सोचा नहीं था कि बकरी पालन का व्यवसाय उनके दिन बदल सकते हैं| बकरी पालन का व्यवसाय मेनका के लिए अब आय का मुख्य जरिया बन चुका है| और इस व्यवसाय से कम समय में हुई लाभ ने उसके परिवार के अच्छे दिन ला दिए हैं | मेनका अब बकरी पालन के व्यवसाय को आगे बढ़ाना चाहती हैं |

मेनका उईके बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखंड परसवाड़ा के ग्राम  डेंडवा की रहने वाली युवती है | परिवार का गुजारा चलाने वह अपने माता-पिता की मदद करती हैं| परिवार के पास थोड़ी सी खेती के अलावा आय का कोई जरिया नहीं था | ऐसे में पशु चिकित्सालय बोदा के चिकित्सक ने मेनका को बकरी पालन की सलाह दी और उसे बैंक से बकरी पालन के लिए ऋण  दिलाया |

वर्ष 2016-17 में मेनका को 10 बकरियों और एक बकरे की इकाई के लिए बैंक से 77 हजार 546 रुपए का ऋण दिलाया गया | इसमें से आधी राशि पशु चिकित्सा विभाग द्वारा अनुदान के रूप में दिए गए हैं | मेनका को बकरी पालन के लिए इकाई की कुल लागत का मात्र 10% लगाना पड़ा | बैंक से ऋण मिलते ही मेनका ने 10 देसी प्रजाति की बकरियां और जमनापारी नस्ल का एक बकरा खरीदा|

बकरी पालन का व्यवसाय कर मेनका ने अपनी गरीबी को दूर किया - गांव गुरु

बकरी पालन का व्यवसाय कर मेनका ने अपनी गरीबी को दूर किया – 

पशु चिकित्सा विभाग द्वारा उसकी बकरियों के लिए 3 माह का आहार उपलब्ध कराने के साथ ही बकरियों का 5 वर्ष का बीमा भी कराया गया है | मात्र 6 माह की अवधि में ही मेनका की बकरियों ने 8 मादा और 7 नर बच्चों को जन्म दे दिया है| बकरियों के बच्चे अब बड़े हो गए हैं और इनकी वर्तमान में कीमत 25 हजार रुपए हो गई हैं|

मेनका ने एक बकरी 3 हजार और एक बकरा 4 हजार रुपए की दर की कीमत रखी हैं | इनमें से 6 बकरियों और 5 बकरों को बेच दिया है | इससे उसे 6 माह में 38 हजार रुपए की शुद्ध आय हुई है | मेनका ने पहली बार में हुई आय से बैंक का ऋण भी अदा कर दिया है | मेनका बकरी पालन के इस धंधे से कम समय में मिले अधिक लाभ से संतुष्ट और बहुत खुश हैं इससे उसकी आर्थिक स्थिति भी अब सुधरने लगी है|

अब वह बकरी पालन केंद्र को और आगे बढ़ाना चाहती है | मेनका कहती हैं कि – बकरी पालन के लिए बैंक से ऋण और पशु चिकित्सा विभाग से मदद नहीं मिलती तो उसके अच्छे दिन शायद नहीं आ पाते | अब वह गांव के दूसरे लोगों को भी बकरी पालन व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं|

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