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वैज्ञानिक विधि से करें पशुओं के चारे का भंडारण – गांव गुरु

Posted by Pramod on March 10, 2018
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पशुओं से ज्यादा दूध उत्पादन प्राप्त करने के लिए हमें पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक चारे की आवश्यकता होती है| इन चारों को पशुपालक या तो खुद उगाता है या फिर कहीं और से खरीदता है| चारे की फसल उगने का एक खास समय होता है जो कि अलग-अलग चारे के लिए अलग- अलग है|

चारे को ज्यादा हरी अवस्था में पशुओं को खिलाया जाता है| चारे की कमी से बचने के लिए पशुपालक पहले से ही चारे का भंडारण कर लेते हैं| ताकि कमी के समय उसका प्रयोग पशुओं को खिलाने के लिए किया जा सके|

लेकिन इस तरह से भंडारण करने से उसमें पोषक तत्व बहुत कम रह जाते हैं| इसी चारे का भंडारण यदि वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो उसकी पौष्टिकता में कोई कमी नहीं आती है|

आइए जानते हैं कुछ वैज्ञानिक विधि –

घास को सुखाकर रखना ( हे बनाना ) –

हे बनाने के लिए घास को इतना सूखाया जाता है जिससे कि उसके नमी की मात्रा 15-20% तक ही रह जाए| इससे जीवाणुओं की एंजाइम क्रिया रुक जाती है, लेकिन इससे चारे की पौष्टिकता में कमी नहीं आती है|

हे बनाने के लिए लोबिया, बरसीम, लूसर्न, सोयाबीन, मटर आदि| इसके अलावा ज्वार, नेपियर, जौ, बाजरा आदि घासों का प्रयोग किया जा सकता है| लेग्यूम्स घासों में पाचक तत्व अधिक होती है तथा इसमें प्रोटीन व विटामिन पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं| दुग्ध उत्पादन के लिए ये फसलें बहुत उपयुक्त होती हैं| हे बनाने के लिए या चारा सुखाने के लिए निम्नलिखित 3 विधियों में से कोई भी विधि अपनाई जा सकती है|

चारे को गट्ठरों में सुखाना –

इसमें चारे को काटकर 24 घंटो तक खेत में पड़े रहने देते हैं| इसके बाद इसे छोटी-छोटी ढेरियों अथवा गट्ठरों में बांधकर पूरे खेत में फैला देते हैं| इन गट्ठरों को बीच-बीच में पलटते रहते हैं जिससे नमी की मात्रा घट कर लगभग 18% हो जाए|

चारे को परतों में सुखाना –

जब चारे की फसल में फूल आने लगते हैं तो उसे काट कर परतों में पूरे खेत में फैला देते हैं और खेतों में तब तक पलटते रहते हैं जब तक की उसमें पानी की मात्रा लगभग 15% तक ना रह जाए| इस को इकट्ठा करके ऐसी जगह रखे जहां बारिश का पानी ना आ सके| इस प्रक्रिया से पशुपालक चारे का भंडारण कर सकता है|

चेहरे को तिपाई विधि से सुखाना –

जहां भूमि अधिक गीली रहती हो और जहां बारिश अधिक होती हो ऐसे स्थानों पर खेतों में तिपाइयां गाड़कर चारे की फसलों को उन पर फैला देते हैं| इस प्रकार वे भूमि के बिना संपर्क में आए हवा व धूप से सूख जाती हैं|  कई स्थानों पर घरों की छत पर भी घासों को सुखा कर हे बनाया जाता है।

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