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अरंडी की यह किस्म देगी, प्रति हेक्टेयर 4 टन उत्पादन – गांव गुरु

Posted by Pramod on May 2, 2018
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अरंडी के बीजों पर हाल में एक नया प्रयोग किया गया| विशेषज्ञों के मुताबिक इस प्रयोग के बाद अरंडी का उत्पादन 2 गुना बढ़ जाएगा| उत्पादन बढ़ाने के लिए आपको ना खेती का तरीका बदलना पड़ेगा और ना ही ज्यादा पैसा लगाना होगा|

सरदार कृषि नगर दातीवाडा कृषि विश्वविद्यालय (एसडीएयू), पालनपुर के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित उच्च उपज की जीसीएच-7 किस्म ने किसानों की आमदनी का मार्ग खोल दिया है|

अगर परंपरागत तरीके से अरंडी की खेती की जाए तो प्रति हेक्टेयर 2 टन से अधिक उत्पादन नहीं मिल पाता है| लेकिन इस तरीके से खेती करने पर अरंडी के पैदावार प्रति हेक्टेयर 4 टन तक बढ़ जाती है|

जीसीएच-7 किस्म विपरीत जलवायु स्थिति को झेलने में सक्षम है| कीटों का हमला एक दूसरी समस्या है| और एसडीएयू ऐसे बीजों के विकास के लिए काम कर रहा है, जो इनके प्रति भी प्रतिरोधक क्षमता वाला हो|

 इस प्रयोग को इस्तेमाल करने के बाद गुजरात समेत तेलंगाना, राजस्थान तथा अन्य अरंडी उत्पादक दूसरे बड़े राज्यों को भी बहुत मुनाफा होगा| सबसे खास बात यह है कि यहां के किसानों के जीवन में भी एक क्रांतिकारी बदलाव आएगा|

भारत अरंडी तेल और अरंडी खली की वैश्विक मांग के करीब 90% की आपूर्ति करता है| विदेशों से मांग में लगातार बढ़ोतरी हुई है| अरंडी तेल का उपयोग फार्मास्युटिकल्स और विमानन (एक ईंधन के तौर पर किया जाता है, क्योंकि यह शून्य से 40 डिग्री के नीचे तापमान पर भी नहीं जमता है) सहित विभिन्न उद्योगों में किया जाता है|

अरंडी की मांग वैश्विक स्तर पर अधिक होने के कारण अगर इसका उत्पादन अधिक हुआ तो भी इसकी कीमत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा|

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