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इस साल किसानों पर मेहरबान रहेगा मानसून, स्काईमेट ने जारी किया मौसम पूर्वानुमान – गांव गुरु

Posted by Pramod on April 6, 2018
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किसानों के लिए अच्छी खबर है| मौसम विभाग का पूर्वानुमान के अनुसार इस बार अच्छी बारिश होने के आसार हैं|स्काईमेट ने 2018 के लिए मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है| इसका ईमेल के अनुसार जून से सितंबर तक 4 महीने की अवधि के लिए मानसून 2018 में 887 मिमी की लंबी अवधि की औसत सामान्य रहने की संभावना है|

मौसम विभाग उत्तर प्रदेश के निदेशक डॉक्टर जेपी गुप्ता बताते हैं – “इस बार देशभर में सामान्य बारिश होने की उम्मीद है| लॉ-नीना के असर से ऐसा होता है| उत्तर-भारत में सामान्य से अधिक बारिश का पूर्वानुमान है| इस बारिश से किसानों को फायदा होने वाला है|

4 महीनों के बारिश के सीजन, दक्षिण-पश्चिम मानसून के साथ बहुत-सी विविधताएं जुड़ी है| साथ ही इसकी विदाई तक कुछ रहस्यमई शक्तियां भी बनी रहती है | मानसून में कुछ इलाकों में अधिक वर्षा होती है, जबकि कहीं कम बारिश और कहीं सूखे के हालात दिखाई देते हैं|

उत्तर भारत की अगर बात करें तो यहां तीन पर्वतीय राज्य है| जिसमें जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड आते हैं| जबकि मैदानी इलाकों में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। देश के उत्तरी भागों में पिछली बार मानसून कमजोर रहा था और बारिश बहुत ही कम हुआ था|

पिछले 4 सालों में मानसूनी बारिश

2014 – 89 %

2015 – 86%

2016 – 97%

2017 – 95%

मानसून सबसे आखिर में उत्तर प्रदेश में ही पहुंचता है| हलाकि प्री-मानसून वर्षा की गतिविधियां मार्शल के आने से पहले कभी-कभी होती रहती हैं| उत्तर-भारत में मानसून वर्षा की मुख्यतः ट्रफ, पश्चिम विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से उठने वाले मौसमी सिस्टमों के चलते होती हैं|

उत्तर-भारत के राज्यों में मानसून 2018 के संभावित प्रदर्शन की बात करें तो यहां पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिम उत्तर-प्रदेश में सामान्य मानसून वर्षा का अनुमान है| राजस्थान में पिछले 2 वर्षों की तरह इस बार अत्यधिक मानसून वर्षा नहीं होगी| बल्कि सामान्य बारिश की संभावना है|

दिल्ली, अमृतसर, चंडीगढ़, आगरा और जोधपुर सहित सभी प्रमुख शहरों में मॉनसून 2018 में सामान्य वर्षा के आसार हैं| पूर्वी उत्तर-प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर में मॉनसून 2018 में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है| स्काइमेट ने अनुमान लगाया है – वाराणसी, गोरखपुर और लखनऊ में कुछ अधिक वर्षा होगी| जबकि श्रीनगर, शिमला, मनाली और देहरादून में इस बार सामान्य या सामान्य से अच्छी बारिश होने की संभावना है|

पिछले 2 वर्षों में राजस्थान को छोड़कर सभी मैदानी राज्य में मानसून वर्षा में कमी रही है| जबकि पर्वतीय राज्यों में 2016 में मानसून सामान्य से कुछ कमजोर रहा था| लेकिन 2017 में मानसून का प्रदर्शन सामान रहा था|

कृषि के लिए है महत्वपूर्ण

मानसून कृषि के लिए महत्वपूर्ण है| क्योंकि आधे से ज्यादा खेती बाड़ी मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है| जहां सिंचाई के साधन है वहां के लिए भी मानसूनी बारिश जरूरी है| क्योंकि बारिश नहीं होगी तो नदियां-झीलें भी सूख जाएंगी| जहां से सिंचाई के लिए पानी आता है| देश में गर्मी की शुरुआत होते ही किसान मानसून पर टकटकी लगा कर बैठ जाते हैं| लेकिन मानसून एक ऐसी अबूझ पहेली है जिसका अनुमान लगाना बेहद जटिल है|

कारण यह है कि भारत में विभिन्न किस्मों के जलवायु जोन और उप जोन है| हमारे देश में 127 कृषि जलवायु उपसंभाग हैं| और 36 संभाग हैं| हमारा देश विविध जलवायु वाला है| समुंद्र, हिमाचल और रेगिस्तान मानसून को प्रभावित करते हैं| इसलिए मौसम विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद मौसम के मिजाज को 100 फीसदी भांपना अभी भी मुश्किल है|

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