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खेती में युवाओं के योगदान के लिए मिसाल बने अचल मिश्रा – गांव गुरु

युवाओं का कृषि के प्रति बढ़ते रुचि की मिसाल उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में रहने वाले किसान अचल मिश्रा ने पेश की है | इन्होंने गन्ने की आधुनिक तरीके से खेती करते हुए कई बार प्रदेश स्तरीय व जिला स्तरीय पुरस्कार प्राप्त किए हैं| इस वर्ष भी इन्होंने गन्ना के अच्छे उत्पादन के मद्देनजर, जिले में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया है |

अचल मिश्रा का मानना है कि – “उन्होंने गन्ने की खेती के लिए केंद्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ व कोयंबटूर स्थिति अनुसंधान केंद्रों से सफल खेती की जानकारी प्राप्त की है |” यदि उनकी शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो वह लखनऊ विश्वविद्यालय से LLB की डिग्री हासिल की है|

वर्ष 2005 से खेती प्रारंभ करने वाले अचल ने साल 2007-08 में गन्ना की खेती से सर्वाधिक उत्पादन के पैमानों पर खरा उतरते हुए उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया | इस वर्ष भी उन्होंने गन्ने की COO-238 किस्म से प्रति बीघा लगभग 250 क्विंटल से ऊपर की उपज प्राप्त की है | जिस दौरान गन्ने की लंबाई लगभग 18.5 फीट प्राप्त की | साथ ही वजन भी अच्छा आंका गया |

आपको बताते चलें कि गन्ने की खेती में अचल मिश्रा, “गोबर की खाद, हरी खाद आदि का इस्तेमाल करते हैं | साथ ही कीटनाशकों आदि का इस्तेमाल कम से कम करते हैं |” पेड़ों की फसल के दौरान वह गन्ने की पत्ती को सड़ाकर एक बेहतर खाद के तौर पर इस्तेमाल करते हैं | साथ ही यूरिया का इस्तेमाल वह स्प्रे के तौर पर करते हैं | जिस दौरान उसकी 2 से 3 किलोग्राम की मात्रा प्रति एकड़ स्प्रे करते हैं | तो वहीं उनका मानना यह भी है कि गन्ने की खेती विशेषकर पानी पर निर्भर करती है |

खेती में युवाओं के योगदान के लिए मिसाल बने अचल मिश्रा - गांव गुरु

खेती में युवाओं के योगदान के लिए मिसाल बने अचल मिश्रा – गांव गुरु

उन्होंने 12 बीघे की खेती से यह साबित कर दिया है की कम रकबे में अच्छी खेती के द्वारा अच्छी कमाई की जा सकती है| शुरुआती दौर में उन्होंने खेती की अधिक जानकारी ना होने के कारण महाराष्ट्र के किसानों से भी मुलाकात कर जानकारी ली | और गन्ने की अच्छी खेती के गुर सीखे | एक एकड़ की खेती से अचल ने अब 2 लाख 80 हजार रुपए की शुद्ध बचत प्राप्त की है |

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