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टमाटर को विभिन्न कीटों से बचाने के लिए करें उचित प्रबंधन – गांव गुरु

Posted by Pramod on April 12, 2018
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भारत एक कृषि प्रधान देश है| यहां भिन्न-भिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं| जिनमें सब्जी वर्ग की फसलों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है| सब्जी उत्पादन में भारत का चीन के बाद दूसरा स्थान है| सब्जी वर्ग की फसलों में देखा जाए तो टमाटर अपनी अहम भूमिका निभाता है| उत्पादन की दृष्टि से टमाटर एक महत्वपूर्ण सब्जी की फसल है| जो कि सब्जी व फल दोनों प्रकार से काम में आता है| अगर पाला नहीं पड़े तो टमाटर की फसल वर्षभर उगाई जा सकती है| टमाटर मैं मुख्य रूप से विटामिन ए व सी पाया जाता है| इसका उपयोग ताजे फल के रूप में या उन्हें पकाकर डिब्बाबंदी करके अचार, चटनी, सूप बनाकर व अन्य सब्जियों के साथ पकाकर भी किया जा सकता है| टमाटर की फसल में कई प्रकार के कीड़ों का आक्रमण होता है| जिनकी सही समय का पहचान करके प्रबंधन किया जाए तो वाकई किसान भाइयों को लाभ मिलेगा|

टमाटर में लगने वाले कीट निम्न प्रकार हैं-

नर्सरी में पौधों को कीड़ों के प्रकोप से बचाने के लिए मोनोक्रोटोफॉस 36 एस.एल. एक मिलीलीटर तथा साथ में जाइनेब या मैन्कोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोलकर छिड़काव करें|

सफेद लट:

यह कीट टमाटर की फसल को काफी नुकसान पहुंचाता है| इस कीट की लटें पौधे की जड़ों को खाती हैं| इसके प्रकोप से पौधा सूख कर मर जाता है|

प्रबंधन:

बुवाई वाले खेत में फसल चक्र अपनाना चाहिए|

वयस्क कीट प्रकाश प्रपंच के ऊपर भारी संख्या में आकर्षित होते हैं| अतः इसका प्रयोग करना चाहिए|

इस कीट के वयस्क पेड़ पौधों पर भारी संख्या में बैठे रहते हैं| जिनको हाथ या किसी लकड़ी से छलका कर उन्हें इकट्ठा करके जमीन में दबा दें या फिर केरोसीन युक्त पानी में डालकर मार दें|

इस कीट के नियंत्रण हेतु फोरेट 10 जी 25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से रोपाई से पूर्व कतारों में पौधों की जड़ों के पास डालें|

फल छेदक:

इस कीट का वयस्क भूरे रंग का तथा लट हरे रंग की होती हैं| इस कीट की सबसे हानिकारक अवस्था ही लट होती है| लट शुरू में मुलायम पत्तों पर हमला करती है| तथा बाद में फलों पर आक्रमण करती है|

एक लट 2-8 फल नष्ट करने में सक्षम होती है| ऐसे फल उपभोक्ताओं द्वारा पसंद नहीं किए जाते हैं| बाजार में अच्छे भाव भी नहीं मिलते हैं| फल पर किए गए छेद गोल होते हैं| आक्रमण हरे फलों पर अधिक होता है| जिससे अम्लता बढ़ जाती है| और ये फल धीरे-धीरे कम पसंद किए जाते हैं|

प्रबंधन:

40 दिन पुराने अमेरिकी लंबा गेंदा और 25 दिन पुरानी टमाटर की पौध को 1:16 के अनुपात में पंक्तियों में एक साथ बोयें| मादा पतंगे अण्डे देने के लिए गेंदे की ओर आकर्षित होती है|

प्रकाश जाल की स्थापना से वयस्क पतंगों को मारने के लिए आकर्षित किया जा सकता है|

इस कीट संबंधित फेरोमोन ट्रेप एक हेक्टेयर में 12 लगाने चाहिए|

क्षतिग्रस्त फलों को इकट्ठा करके नष्ट कर देना चाहिए|

प्रारंभिक दौर लार्वा को मारने के लिए 5%  नीम के बीज गिरी के तेल का छिड़काव करें| प्रति हेक्टेयर (‘टी’ आकार के) 15-20 पक्षियों के बैठने के लिए रखना चाहिए| जो कीट भक्षी पक्षियों को आमंत्रित करने में मदद करता है|

फल छेदक से संरक्षण के लिए एन.पी.वी. 250 एल.ई./ हेक्टेयर के साथ-साथ 20 ग्राम / लीटर गुड़ का  10 दिनों के अंतराल पर छिड़काव भी लाभदायक होता हैं|

मैलाथियान 50 cc एक मिली मीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए|

रोपाई से पूर्व 25 किलो कार्बोफ्यूरान 3G प्रति हेक्टेयर की दर से भूमि में मिलाएं या पौधे की रोपाई के समय जड़ों के पास 8-10 कण डालकर रोपाई करें|

टमाटर को विभिन्न कीटों से बचाने के लिए करें उचित प्रबंधन

 

सफेद मक्खी:

एक छोटा सा सफेद रंग का कीट होता है| इसके प्रोढ़ व निम्फ दोनों ही पौधे का रस चुसकर नुकसान करते हैं| इसके द्वारा अर्क चूसने और संयंत्र पोषक तत्वों को हटाने के कारण पौधे कमजोर हो जाते हैं| अगर पौधों के आसपास पानी भरा हुआ है तो नुकसान और अधिग गंभीर भी हो सकता है| सफेद मक्खी बायोटाइप ‘बी’ टमाटर पत्ती कर्ल वायरस के संक्रमण और संचालित होने से फसल को पूर्णरूप से नुकसान होने का खतरा हो जाता है|

प्रबंधन:

वयस्क को आकर्षित करने के लिए एक हेक्टेयर में 12 पीले रंग के येलो कार्ड लगाने चाहिए|

सफेद मक्खी पत्ती कर्ल वायरस के प्रचार करने में वेक्टर के रूप में कार्य करती हैं| सभी प्रभावित पौधों को आगे प्रसार से बचाने के लिए उखाड़ कर निकाल देना चाहिए|

नीम की निंबोली या पत्तियों से तैयार 5% नीम के अर्क का छिड़काव करें|

7 पत्ती युक्त बना जीवामृत का छिड़काव करें|

आक, धतुरा, नीम, करंज आदि की पत्तियों से तैयार वनस्पति काढे का छिड़काव करें|

एसीफेट 75 एस.पी. 2 ग्राम या ऐसीटामिप्रिड 20 एस.पी. 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें|

 

माहू:

यह नरम शरीर नाशपाती के आकार का पंखों वाला या पंखहीन कीट होता है| झुंड में रहकर रस चुसना, मलिनकिरण या पत्ते को मोड़ना तथा शहद्नुमा पदार्थ छोड़ना इसकी पहचान होती है|

प्रबंधन:

वयस्क को आकर्षित करने के लिए एक हेक्टेयर में कम से कम 12 पीले रंग के येलो कार्ड लगाने चाहिए|

नीम की निंबोली या पत्तियों से तैयार 5% नीम के अर्क का छिड़काव करें|

7 पत्ती युक्त बना जीवामृत का छिड़काव करें|

आक, धतुरा, नीम, करंज आदि की पत्तियों से तैयार वनस्पति काढे का छिड़काव करें|

डाइमेथोएट 30 ई.सी. एक मिली या थायामिथोक्जाम 25 डब्ल्यू.जी. 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए|

हरा तेला:

यह हरे रंग का नरम शरीर वाला हेलीकॉप्टर के आकार का कीट होता है| यह पत्ती की निचली सतह पर रहता है तथा हमेशा टेढ़ा चलता है|

प्रबंधन:

नीम की निंबोली या पत्तियों से तैयार 5% नीम के अर्क का छिड़काव करें|

7 पत्ती युक्त बना जीवामृत का छिड़काव करें|

आक, धतुरा, नीम, करंज आदि की पत्तियों से तैयार वनस्पति काढे का छिड़काव करें|

थायामिथोक्जाम 25 डब्ल्यू.जी. 0.4 ग्राम या या डाइमेथोएट 30 ई सी 1 मिली /लीटर की दर से छिड़काव करना चाहिए|

ऐसीफेट 75 एस.पी. 2 ग्राम या ऐसीटामिप्रिड 20 एस.पी. 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए|

सुत्रकृमी:

इसकी वजह से टमाटर की जड़ों में गांठ पड़ जाती है| तथा पौधों की बढ़वार रुक जाती है जिससे उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है|

प्रबंधन:

रोपाई से पूर्व 25 किलो कार्बोफ्यूरान 3G प्रति हेक्टेयर की दर से भूमि में मिलाएं या पौधे की रोपाई के समय जड़ों के पास 8-10 कण डालकर रोपाई करें|

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