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स्वचालित धान रोपाई यंत्र

$ 770.000
स्वचालित धान रोपाई यंत्र

मशीनी बोवाई में 1 एकड़ की बुवाई करने के लिए 1.2 मी. चौड़ा और 10 मी. लंबा दो बीज की क्यारी लगती है। नर्सरी के क्यारी को ठीक तरीके से समतल कर लें क्योंकि बीज बुवाई में सभी तरह बराबर मोटाई रहना चाहिए। पानी देने और निकालने के लिये नाली बना देना चाहिए आमतौर पर गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट 1:3 के अनुपात में मिट्टी में मिलाया जाता है अगर चिकनी मिट्टी हो तो इसमें एक भाग रेत एक भाग गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट तीन भाग मिट्टी में अच्छी तरह मिलाया जाता है इस मिश्रण में कंकड, पत्थर नहीं रहना चाहिए।
मिट्टी, गोबर खाद एवं रेती को जाली से छान लेना चाहिए ताकि कंकड, पत्थर ना रहें। तैयार क्यारी के ऊपर रख दें, मिट्टी के मिश्रण को फ्रेम के सतह तक सभी तरफ समान रूप से फैला दें। फ्रेम इस्तेमाल करने का मकसद यह है कि बीज की बचत करना और पौधों को चादर को आसानी से निकाल लेना और बीज बेड की ऊंचाई 2 से.मी. समान रूप से बनाये रखना। अगर ऊंचाई होगी तो रोपाई ठीक तरीके से नहीं हो पायेगी। अंकुरित बीज के नस्ल अनुसार 120 से 150 ग्रा. हर खंड में समान रूप बुवाई कर देनी चाहिए।

धान रोपाई के परंपरागत तरीकों में बीज को नर्सरी में बोया जाता है फिर पौधे को धीरे से निकाल कर साफ करके गुच्छा बनाकर जुताई किए गए मिट्टी में बोया जाता है। हाथ से रोपाई करने का काम बहुत मुश्किल एवं थकाने वाला काम होता है। धान के रोपाई में कई घंटे तक झुककर काम करने से कई महिला एवं पुरूष के परिस्थिति कई पीढ़ी से किसानी काम का दर्दनाक हिस्सा है। आज के समय में खेती मजदूरों के फैक्ट्रियों एवं दूसरे कामों में जाने के कारण रोपाई के समय में मजदूरों में काफी कमी आ गई है। नया तकनीक और किसानी काम में विकास के कारण हाथ रोपाई की जगह अब मशीन रोपाई ले रही है। और इसके लिये धान रोपाई मशीन एक अच्छा उपाय है। मशीन रोपाई के लिए पहला कदम चटाई नुमा नर्सरी तैयार करना होता है जो कि अच्छे परिणाम के लिये बहुत जरूरी है।

मशीन रोपा में एक एकड़ खेत के बोवाई करने में आमतौर में 15 से 20 कि.ग्रा. अच्छा बीज काफी होता है। वहीं हाथ से रोपाई करने में 30 कि.ग्रा. बीज लग जाता है। अगर किसान भाई सिस्टम ऑफ राईस इन्टेन्सीफिकेशन ‘श्री विधिÓ को अपनायेंगे तो बीज की खपत और कम हो जायेगी। बुवाई के पहले अंकुरित बीज का महत्व बहुत है। एक साफ बर्तन में साफ पानी लेकर बीज को डालकर धीरे-धीरे हिलायें। खाली और आधे भरे धान को बाहर निकालकर उसमें से अच्छे बीज को बोरी में भर लें। फिर बोरी को 24 घंटे तक पानी में डुबोकर रखें। उसके बाद बोरी को हल्का गर्म और छाया वाली जगह में रखें उसके ऊपर पैरा को 24 घंटे के लिये ढंक दें। अंकुरित होने का समय तापमान पर निर्भर होता है। जब बीज अंकुरित हो जाये और जड़ का शुरूआती चिन्ह दिखें तब बुवाई के लिये बीज तैयार है। जड़ को लंबा नहीं होने देने चाहिए नहीं तो वह बोरी से बाहर आकर एक-दूसरे से उलझ जायेगी।

अंकुरित बीज का बहुत ख्याल रखना पड़ता है क्योंकि कोमल जड़ टूटना नहीं चाहिए। फ्रेम निकालने की ये प्रक्रिया तब तक करनी चाहिए जब तक की पूरी क्यारी की बुवाई न हो।
बीज की क्यारी को पैरा या पतला आलू बोरी से ढंक दें ताकि यह बारिश के बूंद और चिडिय़ा से सुरक्षित हो जाये। मौसम के अनुसार 3 से 4 दिन तक दिन में 2 से 3 बार रोज केन से बीज बेड से पानी दें। बीज के बेड को कभी भी सूखने न दें चौथे दिन जांच कर लें कि इसका उगना काफी अच्छा है और क्या नर्सरी हरी भरी लग रही हैं, इसमें 2 से 2.5 से.मी. का पौधा दिखना चाहिए। अब धान के पैरा को हटाकर इसमें पानी भर दें, पानी का स्तर बीज के बेड से 2 से.मी. ऊपर या पौधे के आधी ऊंचाई तक ही रखें। नर्सरी में निगरानी रखें अगर बीमारी या कीटाणु का हमला हो तो तुरंत इसका रोकथाम करना चाहिए। बुवाई के 17 से 18 दिन में पौधा 12.5 से 15 सेमी. के ऊंचाई में होगा, आम तौर में जब इसका 3 से 4 पत्ता निकल जाये तो समझना चाहिए कि यह रोपाई करने के लिये तैयार है।

Address: Ferris Park
Zip: 365448
Country: United States
Property Id : 59
Price: $ 770.000
Property Size: 190 ft2
Property Lot Size: 2.000 ft2
Rooms: 15
Bedrooms: 5
Bathrooms: 6
Year Built: 1982
Available From: 2016-03-23
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